श्री हित चौरासी जी | Shree Hit Chaurasi Ji

श्री हित चौरासी जी | Shree Hit Chaurasi Ji जोई जोई प्यारो करे सोई मोहि भावे, भावे मोहि जोई सोई सोई करे प्यारेमोको तो भावती ठौर प्यारे के नैनन में,…

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श्री कृष्ण स्त्रोतं | Shree Krishan Strotam

श्री कृष्ण स्त्रोतं | Shree Krishan Strotam ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन् श्रोतुमिच्छामि यथा कृष्णः प्रसीदति ।विना जपं विना सेवां विना पूजामपि प्रभो ॥1॥ यथा कृष्णः प्रसन्नः स्यात्तमुपायं वदाधुना ।अन्यथा देवदेवेश…

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श्री कार्तिकेय स्तोत्र | Shree Kartikeya Strotam

श्री कार्तिकेय स्तोत्र | Shree Kartikeya Strotam स्कंद उवाच –योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः।स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः॥1॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः।तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः॥2॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः।सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः॥3॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो…

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शुक्र स्त्रोत | Shukar Strotam

शुक्र स्त्रोत | Shukar Strotam नमस्ते भार्गव श्रेष्ठ देव दानव पूजित ।वृष्टिरोधप्रकर्त्रे च वृष्टिकर्त्रे नमो नम: ॥1॥ देवयानीपितस्तुभ्यं वेदवेदांगपारग: ।परेण तपसा शुद्ध शंकरो लोकशंकर: ॥2॥ प्राप्तो विद्यां जीवनाख्यां तस्मै शुक्रात्मने…

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राहु स्तोत्र | Rahu Strotam

राहु स्तोत्र | Rahu Strotam ाहुर्दानव मन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः ।अर्धकायः सदाक्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ॥1॥ रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुमीतिदः ।ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुकः ॥2॥ कालदृष्टिः कालरुपः श्रीकष्ठह्रदयाश्रयः ।विधुंतुदः सैंहिकेयो घोररुपो महाबलः ॥3॥ ग्रहपीडाकरो…

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दशरथकृत शनि स्तोत्र | Dashrathkrat Shani Strotam

दशरथकृत शनि स्तोत्र | Dashrathkrat Shani Strotam नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥ नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥ नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।नमो…

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बृहस्पति स्त्रोतं | Brihaspati Strotam

बृहस्पति स्त्रोतं | Brihaspati Strotam पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: ।दधाति दण्डं च कमण्डलुं च, तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम ॥1॥ नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय ते नम: ।नमस्त्वनन्तसामर्थ्यं देवासिद्धान्तपारग ॥2॥ सदानन्द नमस्तेस्तु…

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बुध स्त्रोतं | Budh Strotam

बुध स्त्रोतं | Budh Strotam पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता ।धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च ॥1॥ प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ॥2॥ सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:…

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गुरु पादुका स्तोत्रम् | Guru Paduka Strotam

गुरु पादुका स्तोत्रम् | Guru Paduka Strotam ॥ श्री गुरु पादुका स्तोत्रम् ॥ अनंत-संसार समुद्र-तार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्याम् ।वैराग्य साम्राज्यद पूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥1॥ कवित्व वाराशिनिशाकराभ्यां दौर्भाग्यदावांबुदमालिकाभ्याम् ।दूरिकृतानम्र विपत्ततिभ्यां नमो…

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यज्ञ की पूर्णाहुति । Yagh Ki Purnahuti

यज्ञ की पूर्णाहुति । Yagh Ki Purnahuti महाराज युधिष्ठिर ने एक बार यज्ञ किया। यज्ञ में अन्तिम आहुति अर्पण की तो घंटे की आवाज नहीं हुई। अतः धर्मराज युधिष्ठिर को…

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सद्गृहस्थ | Sadgrahsth

सद्गृहस्थ | Sadgrahsth स्वामी विवेकानंदजी ऐसे ही संत थे, जिन्होंने परदेश की जमीन पर भारतीय संस्कृति का ध्वज लहराया। गुरु की आज्ञा से वे अमेरिका गये। वहाँ उन्हें कोई पहचानता…

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गुप्तदान | Guptdan

गुप्तदान | Guptdan भारत में किसी मन्दिर का जीर्णोद्धार हो रहा था। पचास हजार रुपयों की जरूरत थी। ट्रस्टी गये किसी बडे व्यापारी के पास। वह दानशील है। दस बजे…

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राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र | Radha Kriya Kataksh Stotram

राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र | Radha Kriya Kataksh Stotram मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणिप्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनिव्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगतेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥ अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थितेप्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले ।वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालयेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥ अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवांसविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त–बाणपातनैः…

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शक्ति का प्रागट्य | Shakti Ka Pragatya

शक्ति का प्रागट्य | Shakti Ka Pragatya शिवजी का धनुष जब जनकजी को देने में आया तब मुख्य स्थान पर रखने के लिए कई हाथियों द्वारा खींचवाना पडा था। यह…

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पुरस्कार के लायक | Purshkar Ke Layak

पुरस्कार के लायक | Purshkar Ke Layak कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला। दनिया भर के लोग उन्हें धन्यवाद देने, अभिनन्दन देने आने लगे। व्यक्तियों की लम्बी लाइन लग…

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छत्रछाया | Chhatarchhaya

छत्रछाया | Chhatarchhaya सावधान हनुमानजी की आँखे अवध के राज दरबार में घूमने लगीं। श्री लक्ष्मणजी दिखाई देते है, शत्रुध्न दिखाई देते है पर भरतजी नहीं दिखाई दिये। भरतजी कहाँ…

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