जीन माता जी चालीसा | Jeen Mata Ji Chalisa

॥ दोहा ॥ श्री गुरुपद सुमिरण करूँ, गौरीनंदन ध्याय ।वरणऊ माता जीण यश , चरणों शीश नवाय ॥झांकी की अद्भुत छवि , शोभा कही न जाय ।जो नित सुमरे माय…

Continue Readingजीन माता जी चालीसा | Jeen Mata Ji Chalisa

काली माता जी चालीसा | Kali Mata Ji Chalisa

॥ दोहा ॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार ।महिष मर्दिनी कालिका , देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥ रि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥अष्टभुजी…

Continue Readingकाली माता जी चालीसा | Kali Mata Ji Chalisa

चामुण्डा माता जी चालीसा | Chamunda Mata Ji Chalisa

||दोहा|| नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड ।दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।।मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत ।मेरी भी बढ़ा हरो हो जो…

Continue Readingचामुण्डा माता जी चालीसा | Chamunda Mata Ji Chalisa

काली माता जी आरती | Kali Mata Ji Aarti

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोङ तेरे द्वार खडें,पान सुपारी धवजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट क़रें।सुन जगदम्बें कर न विलम्बें, संतन के भंडार भरें,संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,…

Continue Readingकाली माता जी आरती | Kali Mata Ji Aarti

End of content

No more pages to load