Devkatha

रामजी की निकली सवारी | RamJi Ki Nikali Savari

धीरे चला रथ ओ रथ वाले,
तोहे खबर क्या ओ भोले भाले,
एक बार देखे दिल ना भरेगा,
सौ बार देखो फिर जी करेगा ,
व्याकुल बड़े हैं कबसे खड़े हैं ,
दर्शन के प्यासे सब नर और नारी,
रामजी की निकली सवारी,
रामजी की लीला हैं न्यारी,

चौदह बरस का वनवास पाया,
माता पिता का वचन निभाया ,
धोखे से हर ली रावण ने सीता,
रावण को मारा लंका को जीता ,
तब तब यह आए तब तब यह आए ,
जब जब ये दुनिया इनको बुलाये,
रामजी की निकली सवारी,
रामजी की लीला हैं न्यारी,

एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ ,
बीच में जगत के पालन,
रामजी की निकली सवारी,
रामजी की लीला हैं न्यारी,
रामजी की निकली सवारी,
रामजी की लीला है न्यारी,

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