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श्री गणेश प्रथम मनाऊ ।रिद्धि सिद्धि भरपूर पाऊ ॥
नमो नमो श्री नागणेच्या माता। नमो नमो शिव शक्ति माता ॥
हर रूप में दर्शन दिया। अनेको भक्त ऊवार दिया ॥
ज्वाला में तुम बनी हो ज्वाला। हर संकट को तुमने ही टाला ॥
चिंतपूर्णी में हर चित्त को पूर्ण करती। सब की खाली झोली तुम ही भरती ॥
नागाणा सु चली नागाणी, हर भक्तों के घर में आवे ।
कलयुग में जो तुम्हे मनावे , उसे अपनी शक्ति दिखावे ॥
शिव शंकर की तुम हो पटरान। आदि शक्ति है मत भवानी ॥
ब्रह्मा की तुम हो ब्रह्माणी माता। स्वर दो मुझे सरस्वती माता ॥
श्री राम की तुम बनी जानकी। सत्य की ओर चली जानकी ॥
श्री कृष्ण की तुम बनी राधिका। प्रेम की डोर से बंधी राधिका ॥
जब जब तुम क्रोध में आवो। रूप काली का तुम ही बनाओ ॥
महाकाल की बनी महाकाली। मुझे अब कल से तुम ही बचाओ ॥
भूत प्रेत जो भी आवे। तेरी शक्ति से मुझे छू ना पावे ॥
तीन लोक में डंका बाजे। नागणेच्या माता तेरे पर्चे साचे ॥
श्री विष्णु के साथ तुम्हे मनावे। अन्न धन लक्ष्मी घर में पावे ॥
कोडन की तुम करदो कंचन काया। तेरी महिमा का पार न पाया ॥
बांझन जो तुम्हे मनाव। उसे संतान सुख दिलावे ॥
जो कुंवारी कन्या मनाव। अपना वर तुमसे ही पावे ॥
जो विधार्थी तुम्हे मनावे। अपनी विद्या भरपूर पावे ॥
जो व्यापारी तुम्हे मनावे। अपने व्यापर में वृद्धि पावे ॥
नौ दीपक जो करे हमेशा। नव दुर्गा का साथ रहे हमेशा ॥
लापसी चावल को जो भोग लगावे। अपने रोगो से मुक्ति पावे ॥
सातम तेरस की जोत जगाव। सुख शांति घर में पावे ॥
गुलाब के पुष्प जो तेर चरणों से पावे। उनकी कैंसर, शुगर तुम ही मिटावे ॥
जो कोई सच्चे मन से मनावे। छोटी कन्या का रूप दिखावे ॥
नागण बन क घर चली आवे। कभी छम छम करती पायल बजावे ॥
भक्तो को ऐसे दर्श दिखावे ॥
तेरी महिमा मुख से वर्णी न जावे। ऋषि मुनि तेरा पार न पावे ॥
मै तो एक भोला भक्त हु माता। पूजा पाठ करना नहीं आता ॥
जो कोई शंका तेरी शक्ति पर करता। अपनी करनी वही ह भरता ॥
नीम के नीचे कोयल गावे। मोर भी अब नाच दिखावे ॥
नीम की जो करे रखवाली। उसके घर में रहे खुशहाली ॥
नवरात्रो में ऐसी शक्ति। नौ दीपक अखंड रखती ॥
अखंड तेरी ज्योत जगे। भक्तो क सब कष्ट मिटे ॥
एक हाथ में त्रिशूल रखती। दूजे हाथ में शंख बजाती ॥
डम डम तेरा डमरू बाजे। काला गोरा भैरू नाचे ॥
जो भी तेरे द्वार पे आवे। खाली हाथ वो नहीं जावे ॥
नौ महीने तक नारियल रखावे। उनकी मनसा पूर्ण करावे ॥
ब्रह्मा वेद पड़े तेरे द्वारे। शिव शंकर हरी ध्यान लगावे ॥
कान्हा तेरे दर मुरली बजावे। सभी देवता मंगल गावे ॥
सतयुग में मंशा देवी। त्रेता में राठेश्वरी ॥
द्वापर में पंखनी देवी। कलयुग में नागणेची माता ॥
युगो युगो में तेरी शक्ति। समझ समझ कर समझ ना शक्ति ॥
सूरज सामने बना ह मंदिर। शिव शक्ति नागणेच्या धाम कहलावे ॥
जिसकी महिमा वर्णी ना जावे। सूर्यवंशी तेरे ही गुन गावे ॥
ओस्तवाल क कुल की माता। आज ललित भक्त तुम्हे मनाता ॥
सुनो सुनो मेरी भी नागणेची माता, मेरा अपराध क्षमा कर दीज्यो।
मुझे अपनी शरण में लीज्यो, मेरी आस को पूर्ण कीज्यो ।
अपना दस बना मुझे लिज्यो ॥

॥ दोहा ॥
शरणागत को शरण में रखती,
आई सिँह पर हो के सवार ।
शेष नाग पर चढ़ी भवानी,
नागण रूप लियो अवतार ॥

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