Devkatha

॥ श्लोक ॥

ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्,कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्।
उमासुतम् शोक विनाश कारकम्,नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥

॥ स्तुति ॥

गाइए गणपति जगवंदन।
शंकर सुवन भवानी के नंदन।।
गाइए गणपति जगवंदन……

सिद्धी सदन गजवदन विनायक।
कृपा सिंधु सुंदर सब लायक।।
गाइए गणपति जगवंदन……

मोदक प्रिय मृद मंगल दाता।
विद्या बारिधि बुद्धि विधाता।।
गाइए गणपति जगवंदन……

मांगत तुलसीदास कर जोरे।
बसहिं रामसिय मानस मोरे।।
गाइए गणपति जगवंदन……

Share this post (शेयर करें)
Scroll to Top