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करणी माँ स्तुति | Karni Ma Stuti

करणी घण करणी कृपा ,धरणी उर धणियाप ।
माँ करणी मोटा धणी , माँ करणी मां बाप ॥
चार धाम करणी चरण , सह तीरथ सिरमोड़ ।
पद करणी चख परसता ,पातक कट करोड़ ॥

॥ छन्द :— नाराच ॥

नमो अनन्द कन्द अम्ब , मात मैह नन्दिनी ।
निकन्द फन्द दास द्वन्द, विश्व सर्व वन्दिनी ॥
कृपा निधाण किन्नियांण , बीस पाण धारणी।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ॥
माँ,सर्व काज सारणी ॥

बिराजमाण थाण आप, धाम यू देशाण में ।
दिपायमाण भाण जैम , भौर आसमाण मे ॥
सुताज मैह तू सदैव , नैण नैह धारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक , तीन लोक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

नयन्न नैह न्हाळ मॉ , निहाळ बाळ न करे ।
मिटाण शूल पात केत , शूळ हाथ में धरे ॥
दया अपार बार बार , दास हेत धारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

महा समन्द मायने तूं , दास जौय डूबतां ।
बधाय माय बांह बायं, दूध गाय दूवतां ॥
करी सहाय छिन्न माय, नाव से निकारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

पसार पाण किन्नियांण , दास ने उबारतां ।
समन्द नीर भींज चीर , नाव तीर सारतां ॥
निचौर चीर सीर नीर , धाम भौम धारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक , तीन लोक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

करी पुकार बार बार , राव शैख राज ने ।
उबार मोय बैग आज , सार दास काज ने ॥
दया अपार चित्त धार , शिघ्र ही सिधारणी।
नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लोक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

कटाण कैद शैख हैत ,शैत होय सॉवळी ।
भरी उडाण आसमाण ,आपहो उतावळी ॥
छुड़ाय लाय सिन्ध जाय,कैद मुक्त कारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लोक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

बहन्त मग्ग बीच पग्ग , चौथ घघ्घ टूटियो ।
अलग्ग होय संग सग्ग , वन्न माय छूटियो ॥
न जोय के अधार कोय , तौय ने पुकारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

सुणी अदैर दास टैर , चित्त म्हैंर ,सौचगी ।
करी न दैर,पाव प्हैर, छौड़ शैर पौछगी ॥
सरूप धार तूं सुथार , कष्ट सर्व टारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक ,तीन लौक तारणी ॥
मॉ ,सर्व काज सारणी ॥

बिकाण पे चढाण आण,की अचाण कामरो ।
करी पुकार जैत कैत ,आप शर्ण आ परो ॥
दयाळ दास हैत तू , बडापणो बिचारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लोक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

अखन्ड जोत , मंढ होत , बौत जैत बीनवै।
बिकाण री धिराण आज,जाय लाज तो थवे ॥
दया निधाण मंढ माण, पाण ने पसारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लोक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

कबाण पे चढ़ाण बाण,बाण आप बोलियां ।
नचीत जीत हौय तौय, हार हौय कैवियां ॥
हुँ साय हौय जंग तौय , संग में सिधारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

खपाण खोज म्लैच्छ फौज,चित्त चोज तू चढ़ी ।
भरी हुँकार खाय खार, शूल धार ने बढ़ी ॥
हजार शीश हैक लार , वार तुर्क मारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

कृपा अपार जैत हैत, केत खैत तू करी ।
खळा दळा दिया खपाय,कन्ध ब्राज कैसरी ॥
हराय तुर्क कामरौ, तू जैत नै जितारणी ।
नमौ धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

कृपा निधान तो समान, कौन हे जहान मे ।
मिटाण बंक अंक मूळ , पूर्ण आप पाण में ॥
महा समर्थ बीसहथ्थ , दास हैत धारणी ।
नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

सुणन्त टैर आ अदैर, जौर जंग माय ने ।
भरैज नीर भौप घैर , माट शीश लाय ने ॥
दया निधान ऐम कौन , दास दुख्ख हारणी ।
नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

महा समर्थ , बीसहथ्थ, दास शीश धारिये।
शिशू अबौध जाण मौद, नैह सू निहारिये ॥
रखाय मोय शर्ण राज, लाज री रुखारणी ।
नमो धिराण देशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ, सर्व काज सारणी ॥

पसार पाण किन्नियांण, आण शर्ण तो गही।
सहाय माय तौ सिवाय,कौय नाय मो मही ॥
सदा हि दास शर्ण जाण जन्म,‘जै‘ सुधारणी।
नमो धिराण दैशणोक , तीन लौक तारणी ॥
मॉ , सर्व काज सारणी ॥

॥ दोहा ॥

आस काँई उण री करू, हे जिण रे दो हाथ।
मैं लीनी जिणरी शरण,(वो)बीसभुजाळी मात।
मां करणी म्हॉरे धणी, हूँ करणी रो दास ।
धरणी पर करणी सिवा, करू न किणरी आस ।
‘क’ कहता किरपा करे,’र’ कहता रिछपाळ ।
“नी” कहता निरभय करै, सारा संकट टाळ ॥

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