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कठिन काज का समाधान | Kathin Kaj Ka Samadhan

संकट मोचन हनुमान जी के यह चौपाई रास्ता दिखाती है। प्रतिदिन श्रद्धा भाव से इसका 51 या 108 बार जाप करने से, आपके सभी रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाते है, बड़े से बड़े संकटों का नाश हो जाता है और जीवन की हर मनोकामना पूरी हो जाती है।

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥

कवन सो काज कठिन जग माही। जो नहिं होइ तात तुम पाही॥

राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बत्ताकारा॥

यह प्रसिद्ध चौपाई गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस (किष्किन्धा कांड) से ली गई है। इसमें जाम्बवंत जी हनुमान जी को उनका वास्तविक बल याद दिला रहे हैं। यहाँ इस प्रसंग की पूरी चौपाई और दोहा दिया गया है।

चौपाई:

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥

अर्थ:

जाम्बवंत जी (रीछपति) कहते हैं— हे हनुमान! सुनो, आप इतने बलवान होकर क्यों चुप बैठे हैं? आप पवन पुत्र हैं और बल में स्वयं पवन (वायु) के समान हैं। आप बुद्धि, विवेक और विज्ञान के भंडार हैं।अगली चौपाई (जिसमें जाम्बवंत जी हनुमान जी को उनका कार्य याद दिलाते हैं)

चौपाई:

कवन सो काज कठिन जग माही। जो नहिं होइ तात तुम पाही॥

राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बत्ताकारा॥

अर्थ:

हे तात! इस संसार में ऐसा कौन सा कठिन कार्य है जो आपसे न हो सके? आपका तो अवतार ही प्रभु श्रीराम के कार्य को पूरा करने के लिए हुआ है। जाम्बवंत जी के ये वचन सुनते ही हनुमान जी पर्वत के समान विशाल रूप धारण कर लेते हैं।

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